




सुरंगपानी ….श्रद्धेय अटल जी विराट व्यक्तित्व कुशल राजनेता के साथ -साथ महान कवि एवं हिन्दू चेहरा थे । उन्होंने कभी अपनी भावनाओं को काव्य रूप में इस प्रकार व्यक्त किया:-
मैं वीर पुत्र, मेरी जननी के जगती में जौहर अपार ।
अकबर के पुत्रों से पूछो क्या याद उन्हें मीना बाजार ?
क्या याद उन्हें चित्तौड़ दुर्ग में जलने वाली आग प्रखर।
जब हाय सहस्त्रों माताएं तिल तिल जलकर हो गई अमर।
वह बुझने वाली आग नहीं रग- रग में उसे समाए हूं ।
यदि कभी अचानक फूट पड़े विप्लव होकर तो क्या विस्मय ।
हिंदू तन -मन हिंदू जीवन रग -रग हिंदू मेरा परिचय ।
होकर स्वतंत्र मैंने कब चाहा है कर लूं जग को गुलाम?
मैं तो सदा सिखाया है करना अपने मन को गुलाम ।
गोपाल राम के नाम पर कब मैंने अत्याचार किया।
कब दुनिया को हिंदू करने घर-घर में नरसंहार किया ।
कोई बतलाए काबुल में जाकर कितनी मस्जिद तोड़ीं ।
भू भाग नहीं शत -शत मानव के हृदय जीतने का निश्चय ।
हिंदू तन -मन, हिंदू जीवन ,रग -रग हिंदू मेरा परिचय।
अच्छी प्रकार आचरण में लाए हुए दूसरे के धर्म से गुण रहित भी अपना धर्म अति उत्तम है अपने धर्म में तो मरना भी कल्याण कारक है और दूसरे का धर्म भय को जन्म देने वाला है यह बात हमें श्रद्धेय अटल जी ने महसूस कराया एवं सिखाया।
वैसे तो अटल जी के लाखों एवं करोड़ों विकास भारत में है लेकिन छत्तीसगढ़ निर्माण में उनका अहम भूमिका रही। जिसके कारण श्रद्धेय अटल जी को हम छत्तीसगढ़ निर्माता के रूप में जानते हैं। उठो द्रोपदी वस्त्र संभालो अब गोविंद ना आएंगे जैसे अमर कविता हो या रार नहीं ठानूंगा हार नहीं मानूंगा।
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं ।
गीत नया गाता हूं।
जैसे ओज भरी भाषा लोगों को देश एवं समाज के प्रति निष्ठा पूर्वक कार्य करने हेतु उत्साहित एवं रोमांचित करते रहती है।
श्रद्धेय अटल जी खरीद फरोस की राजनीति से हमेशा दूर रहे । उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में कलंक लगे नहीं दिया, सचमुच में वह देव पुरुष थे।
धैर्य ,सहनशीलता, अस्तेय ,समयशीलता, विद्या, क्षमा ,अपरिग्रह, बुद्धि सत्य अक्रोध आदि गुण हैं ,जो प्रत्येक मनुष्य में होने चाहिए यह संदेश भी हमेशा अटल जी हम सबको दिया करते हैं और देते रहेंगे।यही हमारे जीवन का मूल उद्देश्य भी है। श्रद्धेय अटल जी भारतीय संस्कृति एवं उसका जीवन मूल्य पूरी दुनिया में श्रेष्ठ है ।दुनिया को यदि हम शून्य नहीं देते तो गणित शुरू नहीं होता ज्योतिष शास्त्र अध्यात्म में आज भी भारत का विश्व में एकाधिकार है। नर से नारायण बनने की क्षमता हमारी संस्कृति में है ।संस्कृत भाषा दुनिया के श्रेष्ठतम भाषा है सभी भाषाओं की जननी है इसलिए इसे देव वाणी कहते हैं ।जैसे अमुल्य वचन भारत के गौरव के लिए देकर चले गए। विकसित राष्ट्र अमेरिका का पूरी दुनिया पर प्रभुत्व होने के बावजूद भारत में श्रद्धेय अटल जी ने किस प्रकार परमाणु बम निर्माण के लिए भारतीय वैज्ञानिकों को प्रेरित किया जग जाहिर है।
सभी गणमान्य नागरिकों ने श्रध्दा पुष्प अर्पित कर भारत रत्न अजातशत्रु पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी के तैल्य चित्र पर पूजन अर्चन किए।आज के अटल जयंती कार्यक्रम में ग्राम पंचायत सुरंगपानी के सरपंच महोदय श्री जय मंगल सिदार एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष श्री जागेश्वर प्रसाद यादव एवं उपाध्यक्ष श्री हेमसागर गुप्ता जी, डॉ जगबंधु राम यादव (आध्यात्म कलमकार),भाजपा कार्यकर्ता भूषण जायसवाल एवं ग्राम पंचायत के समस्त पंचगण एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे।
