पत्थलगांव : तरेकेला पंचायत का ‘मिडनाइट ऑपरेशन’ ; पंचों ने मीडिया को फोन क्या घुमाया, साहब ने रात ही रात में घुमा दी बोरिंग मशीन!…*

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*पत्थलगांव।* इसे कहते हैं ‘डर की रफ्तार’! ग्राम पंचायत तरेकेला में विकास की ऐसी ‘बुलेट ट्रेन’ चली है कि दुनिया देखती रह गई। कल तक जिन बोरवेलों के लिए ग्रामीण तरस रहे थे, जैसे ही वार्ड पंचों ने मीडिया के सामने भ्रष्टाचार की परतें खोलने का मन बनाया, पंचायत के जिम्मेदारों के हाथ-पांव ऐसे फूले कि उन्होंने सूरज उगने का भी इंतज़ार नहीं किया। नियम-कायदे सो गए और रातों-रात मशीनों ने जमीन का सीना चीर कर दो बोरवेल खड़े कर दिए।

*खबर का खौफ – ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बनने से पहले ही बन गई ‘बोरिंग’ :* सूत्रों की मानें तो वार्ड पंच अखिलेश कुमार भगत और अन्य जागरूक पंचों ने जैसे ही भ्रष्टाचार के पुराने कच्चा-चिट्ठा मीडिया को सौंपने की तैयारी की, इसकी भनक सरपंच-सचिव को लग गई। फिर क्या था?… साहबों को लगा कि अगर खबर छप गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे। आनन-फानन में, बिना किसी ग्राम सभा के, बिना किसी लिखित प्रस्ताव के और बिना पंचों को भनक लगे, अंधेरे का फायदा उठाकर बोरिंग मशीन गांव में उतार दी गई।

*अंधेरे में विकास या पाप छिपाने की कोशिश? -* ग्रामीण अब चुटकी ले रहे हैं कि तरेकेला पंचायत में अब ‘टॉर्च की रोशनी’ में विकास कार्य होंगे। सवाल यह उठता है कि :

* अगर यह कार्य नियमानुसार था, तो इसके लिए रात का सन्नाटा ही क्यों चुना गया?
* क्या सरपंच-सचिव को डर था कि दिन के उजाले में पंच उनसे ‘प्रस्ताव’ मांग लेंगे?
* बिना पंचों के हस्ताक्षर और बिना सरकारी प्रक्रिया के रातों-रात मशीनें बुलाने का खर्च आखिर कौन से ‘गुप्त बजट’ से आ रहा है?

*पंचों की एकता से उड़े जिम्मेदारों के होश :* वार्ड पंचों द्वारा मीडिया के जरिए अपनी आवाज बुलंद करने के फैसले ने पंचायत की सत्ता हिला दी है। सरपंच-सचिव की तिलमिलाहट इस कदर है कि वे अब यह साबित करने में जुटे हैं कि वे “बहुत काम” कर रहे हैं। लेकिन जनता पूछ रही है कि साहब! यह ‘ज्ञान’ आपको तब क्यों नहीं आया जब पुराने सड़क निर्माण और नलकूपों के नाम पर पैसों का बंदरबांट हो रहा था?…

*साहब, ये जनता है, सब जानती है :* रात के अंधेरे में गड्ढे खोदने से भ्रष्टाचार के दाग नहीं छिपते। ग्रामीणों का कहना है कि यह बोरिंग दरअसल सरपंच-सचिव की साख बचाने का आखिरी प्रयास है। बिना प्रस्ताव और बिना तकनीकी स्वीकृति के किया गया यह काम खुद में एक नया घोटाला है, जिसकी जांच अब और भी जरूरी हो गई है।

> “मीडिया के डर से रातों-रात बोरिंग खोदना इस बात का प्रमाण है कि पंचायत में अब तक सब कुछ गोलमाल था। हम इस आधी रात वाली ‘जादुई बोरिंग’ और पुराने गबन की शिकायत ऊपर तक करेंगे।” – अखिलेश कुमार भगत व वार्ड पंच

Chandra Bhushan Jaiswal

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