धरमजयगढ़ : पुसलदा में विकास के नाम पर ‘भ्रष्टाचार का खेल’ ; 54 लाख की पुलिया और सड़क निर्माण में भारी धांधली, बिना सरिया के खड़ी कर दी दीवार!…

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*रायगढ़।* जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पुसलदा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत करोड़ों की लागत से हो रहे निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की ‘दीमक’ लगती नजर आ रही है। विकास के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई को किस कदर ठिकाने लगाया जा रहा है, इसका खुलासा खुद ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती कमला बाई राठिया ने तहसीलदार को सौंपे अपने शिकायती पत्र में किया है।

*बिना लोहे (सरिया) के बना दी रिटेनिंग वाल! -*शिकायत के केंद्र में खेदापाली से पुसलदा मार्ग पर 54 लाख रुपये की लागत से बने तीन छोटे पुल और सुरक्षा दीवार (रिटेनिंग वाल) हैं। सरपंच का आरोप है कि मिट्टी कटाव रोकने के लिए बनाई गई इस दीवार में सरिया (लोहे) का उपयोग ही नहीं किया गया है। यह तकनीकी रूप से न केवल ब्लंडर है, बल्कि ग्रामीणों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ भी है। बिना कंक्रीट मजबूती के खड़ी यह दीवार कभी भी ढह सकती है।

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*गुणवत्ता की खुली पोल : झड़ रहा है सीमेंट -*इंजीनियरिंग के बुनियादी नियमों को ताक पर रखते हुए, निर्माण के बाद दीवार पर पानी का छिड़काव (क्योरिंग) तक नहीं किया गया। नतीजा यह है कि दीवार से सीमेंट अभी से झड़ने लगा है और पूरी संरचना जर्जर दिखाई दे रही है। यही हाल नवनिर्मित सीसी रोड का है, जिसकी गुणवत्ता पर सरपंच ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

*ग्रामीणों की मुसीबत : तोड़ दी पाइपलाइन और नाली -*ठेकेदार की लापरवाही यहीं नहीं रुकी। निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीणों की पुरानी निस्तारी नाली और पेयजल पाइपलाइन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। महीनों बीत जाने के बाद भी इसकी मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे पूरे गांव में जलभराव और पेयजल की समस्या गहरा गई है।

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> “यह निर्माण कार्य शासन के दिशा-निर्देशों की खुली अवहेलना है। हम इस पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।” – श्रीमती कमला बाई राठिया, सरपंच (ग्राम पंचायत पुसलदा)

*प्रशासन की चुप्पी पर सवाल :*सरपंच ने अपनी शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, कलेक्टर रायगढ़ और क्षेत्रीय सांसद को भी भेजी है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागेगा? क्या घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदार और उसे संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर गाज गिरेगी, या फिर कागजी खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?